सरकार-पुलिस के लाख दावे, प्रद्युम्न की हत्या के 3 दिन बाद भी इन 5 सवालों का जवाब नहीं

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प्रद्युम्न की मौत को तीन दिन का वक्त बीत चुका है, लेकिन अभी भी कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब पुलिस नहीं दे पाई है या फिर तफ्तीश की मजबूरी जताकर देना नहीं चाहती है. पुलिस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात का भी जवाब नहीं दिया कि आखिर उस दिन प्रद्युम्न के साथ हुआ क्या था? कैसे वो बाथरुम तक पहुंचा, कैसे बस का कंडक्टर बाथरुम तक पुहंचा. उसके पास वो चाकू कहां से आया और क्या वारदात के वक्त बाथरुम के आसपास टीचर या बच्चे मौजूद थे या नहीं. ऐसे ही कुछ सवाल दिल्ली आजतक भी गुरुग्राम पुलिस से पूछ रहा है.

कैसे हुई गिरफ्तारी, कहां गए खून से सने कपड़े?

पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर अशोक ने कुकर्म की कोशिश के दौरान बच्चे का गला काटा और लोगों के उसे देख लेने पर खुद ही उसे उठाकर स्कूल के लोगों के साथ अस्पताल ले गया. स्कूल के एक माली ने अशोक को खून से सना चाकू धोते हुए देखा था, जिसके बाद फंसने से बचने के लिए अशोक ने खुद ही शोर मचाना और बच्चे को गोद में उठाकर भागना शुरु कर दिया. इसी माली की निशानदेही पर अशोक की गिरफ्तारी हुई, लेकिन जब अशोक गिरफ्तार हुआ तो क्या वो खून से सने कपड़ो में था या घर जाकर अपने कपड़े बदल चुका था. ये बड़ा सवाल है इस पर पुलिस खामोश है.

रंगे हाथ क्यों नहीं हुई गिरफ्तारी?

पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, अगर स्कूल के माली ने अशोक को बाथरुम में चाकू धोते हुए देख लिया था तो फिर उसी वक्त उसके कहने पर या स्टूडेंट और टीचर के देखने पर आरोपी अशोक को रंगे हाथों क्यों नहीं पकड़ा गया. कहीं स्कूल प्रबंधन कुछ छिपाने या दबाने की कोशिश में तो नहीं कर रहा है. पुलिस के पास इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं है.

स्कूल ने क्यों साफ कराया खून?

इस बात की शिकायत प्रद्युम्न के घरवाले भी कर चुके हैं कि स्कूल प्रबंधन ने पुलिस के पहुंचने से पहले ही बाथरुम में पड़े खून के धब्बे साफ करा दिए थे. सवाल ये है कि स्कूल प्रशासन ने पुलिस के पहुंचने तक घटनास्थल को जस का तस क्यों नहीं छोड़ा. जिससे फॉरेंसिक एविडेंस जुटाए जा सकते थे. पुलिस इस मामले पर भी खामोश है और स्कूल प्रशासन के खिलाफ सिर्फ जेजे एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है. जबकि सबूत मिटाने के आरोप में स्कूल पर आईपीसी की धारा 201 के तहत भी कार्रवाई होनी चाहिए.

चाकू का राज अब भी अनसुलझा?

पुलिस के मुताबिक, आरोपी बस के टूल बॉक्स से चाकू लेकर उसे धोने के लिए बाथरुम गया था. जबकि आमतौर पर टूल बॉक्स में चाकू होता ही नहीं है. अब सवाल ये है कि ये चाकू आरोपी खुद खरीद कर लाया था या किसी और का था. बाथरुम में चाकू ले जाने के मसले पर भी पुलिस खामोश है.

महज 15 मिनट में कैसे हो गई वारदात?

तथ्यों के मुताबिक, प्रद्युम्न के पिता ने उसे 7.55 में स्कूल के गेट पर ड्रॉप किया था. जबकि महज 15 मिनट बाद उन्हें बच्चे के लहूलुहान होने की खबर मिल गई. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर इतनी जल्दी ये वारदात कैसे हो गई वो भी तब जब बाथरुम उसके क्लास से महज दस कदम के फासले पर है. उस वक्त क्लास से लेकर कॉरीडोर में बहुत से बच्चे मौजूद थे. पुलिस के पास इस सवाल का भी कोई जवाब नहीं है.

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